नई दिल्ली: अदाणी समूह की कंपनियों में निवेश को लेकर आलोचना का सामना कर रही भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपने जोखिम को कम करने के लिए कंपनियों में अपने ऋण तथा इक्विटी निवेश पर सीमा लगाने की योजना बना रही है।
बता दें कि अडानी समूह पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद LIC के निवेश या एक्सपोजर को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हुए। LIC के अडानी समूह में निवेश पर रिस्क होने के कयास लगाए जाने लगे। इस वजह से बीमा कंपनी के शेयरों में भी बड़ी गिरावट आई।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि LIC निवेश पर ‘सीमा शर्तों’ की तलाश कर रही है। इसके तहत निवेश की एक सीमा निर्धारित किए जाने की योजना है, जो जोखिम को सीमित कर देगी। वर्तमान में LIC किसी कंपनी में बकाया इक्विटी का 10% से अधिक और बकाया डेट का 10% निवेश नहीं कर सकती है।
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सूत्र ने बताया कि इस योजना के जरिए LIC निवेश रणनीतियों को मजबूत करना चाहती है। इसके साथ ही LIC का मकसद अपने निवेश निर्णयों या अडानी समूह जैसी संस्थाओं के जोखिम की सार्वजनिक आलोचना से रोकना है। हालांकि, LIC बोर्ड द्वारा नई योजना को मंजूरी अभी नहीं मिली है। वहीं, इस पर LIC और वित्त मंत्रालय की ओर से भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
Investment policy is about to change, LIC took decision after Adani developments!








