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पंजाब विधानसभा में फीस नियमन संशोधन विधेयक पास, अब निजी स्कूल 5% से ज्यादा नहीं बढ़ा सकेंगे फीस, पिछले 3 साल का अतिरिक्त पैसा होगा रिफंड

चंडीगढ़: पंजाब में निजी स्कूलों की अनियंत्रित फीस वृद्धि और मनमानी से परेशान लाखों अभिभावकों को राहत देने के लिए भगवंत मान सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पंजाब विधानसभा ने बुधवार को सर्वसम्मति से ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) बिल, 2026’ पारित कर दिया है। इस नए कानून के लागू होने के बाद राज्य का कोई भी प्राइवेट स्कूल सालाना फीस में 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 7,800 निजी स्कूलों में पढ़ रहे करीब 32 लाख विद्यार्थियों और उनके परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।

3 साल में ली गई ज्यादा फीस लौटाएंगे स्कूल
सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक और बड़ा ऐलान किया। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान जिन भी प्राइवेट स्कूलों ने 5 प्रतिशत से अधिक फीस वसूली है, उन्हें वह अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस (रिफंड) करनी होगी। सीएम मान ने अमृतसर की एक छात्रा का दर्दनाक जिक्र करते हुए बताया कि फीस न दे पाने के कारण स्कूल प्रबंधन द्वारा प्रताड़ित किए जाने पर उसने आत्महत्या कर ली थी, जिसने उन्हें झकझोर कर रख दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह शिक्षा के व्यवसायीकरण को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे और पूर्ववर्ती सरकारों की तरह अभिभावकों का शोषण नहीं होने देंगे।

तीन डिजिटल यूनिवर्सिटी बिल भी पास
फीस बिल के अलावा विधानसभा में तीन नई डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटीज- क्लाउड यूनिवर्सिटी, एमएस डिजिटल यूनिवर्सिटी और फिजिक्सवाला डिजिटल यूनिवर्सिटी की स्थापना से जुड़े विधेयकों को भी हरी झंडी दे दी गई। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि ये डिजिटल यूनिवर्सिटीज युवाओं को नए दौर के लिए जरूरी स्किल से लैस करेंगी। हालांकि, इन बिलों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायकों और निर्दलीय विधायक राणा इंदर प्रताप ने पर्याप्त समय न दिए जाने का आरोप लगाते हुए वेल में आकर जोरदार नारेबाजी और हंगामा किया। हंगामे के बीच ही इन विधेयकों के साथ-साथ पंजाब जीएसटी संशोधन विधेयक को भी पारित कर दिया गया।

विपक्ष ने बताया ‘पुरानी शराब नई बोतल’, सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
दूसरी तरफ, पूर्व शिक्षा मंत्री व कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने इस बिल पर सवाल उठाते हुए इसे ‘पुरानी शराब नई बोतल’ करार दिया। उन्होंने कहा कि पहले फीस बढ़ोतरी की सीमा 8 फीसदी थी, जिसे अब घटाकर 5 फीसदी किया गया है, लेकिन सरकार कोर्ट में और बाहर अलग-अलग स्टैंड लेती है। वहीं कांग्रेस विधायक अवतार हैनरी जूनियर ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में घटते दाखिलों और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए सरकार यह बिल लेकर आई है। बहरहाल, तमाम विरोध और हंगामे के बीच विधानसभा ने इस फीस नियंत्रण संशोधन विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है।

Fee regulation amendment bill passed in Punjab Assembly; private schools can no longer