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मेरिटोरियस स्कूल पर ताला लगने की नौबत, 90% स्टाफ को मिली ऐसी ड्यूटी कि बच्चों की पढ़ाई हुई ठप; नियम भी ताक पर

लुधियाना: पंजाब के लुधियाना स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल फॉर मेरिटोरियस स्टूडेंट्स में इन दिनों पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है। आलम यह है कि स्कूल में छात्रों को पढ़ाने और व्यवस्था संभालने के लिए स्टाफ ही नहीं बचा है। स्कूल के अधिकांश शिक्षकों और सपोर्ट स्टाफ को जनगणना और चुनावी ड्यूटी में झोंक दिया गया है, जिसके कारण यह अहम शैक्षणिक संस्थान पूरी तरह से खाली हो गया है और बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है।

शिक्षा विभाग के अपने ही नियम हवा-हवाई, 50% की जगह 90 फीसदी स्टाफ नदारद

यह पूरी स्थिति तब पैदा हुई है जब शिक्षा विभाग के नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से यह स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि किसी भी सरकारी स्कूल के 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को ऐसी किसी भी बाहरी ड्यूटी पर तैनात नहीं किया जाएगा। लेकिन, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। शिक्षकों का दावा है कि स्कूल के 90 प्रतिशत से ज्यादा स्टाफ को अलग-अलग तारीखों पर ट्रेनिंग के लिए बुला लिया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि इस ड्यूटी में शिक्षकों के अलावा स्कूल की नर्स और डाटा एंट्री ऑपरेटर जैसे अति आवश्यक कर्मचारियों को भी शामिल कर लिया गया है।

स्टाफ की भारी कमी से स्कूल बंद, मेधावी छात्रों की कोचिंग पर लगा ब्रेक

स्टाफ की इस भारी कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। हालात इतने खराब हो गए कि बीते दिन स्कूल को छात्रों के लिए पूरी तरह से बंद रखना पड़ा। इस वजह से न केवल नियमित कक्षाएं प्रभावित हुईं, बल्कि अन्य अकादमिक गतिविधियां भी रुक गईं। गौरतलब है कि मेरिटोरियस स्कूल कोई आम स्कूल नहीं है, बल्कि यहां मेधावी छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग भी दी जाती है। अब स्टाफ के न होने से यह सारी जरूरी गतिविधियां पूरी तरह से बाधित हो गई हैं।

संविदा शिक्षकों का फूटा गुस्सा, 11वीं की एडमिशन प्रक्रिया को लेकर संकट

इस मनमाने रवैये को लेकर स्कूल के शिक्षकों में भारी रोष है। स्कूल के एक शिक्षक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि संविदा कर्मचारियों के साथ प्रशासन का रवैया बिल्कुल असमान और भेदभावपूर्ण है। उनका कहना है कि वे सालों से खुद को नियमित करने की मांग कर रहे हैं जिस पर कोई ध्यान नहीं देता, लेकिन जब चुनाव या अन्य ड्यूटी की बात आती है तो उनसे स्थायी कर्मचारियों की तरह ही पूरा काम लिया जाता है। वहीं, एक अन्य शिक्षक ने चिंता जताते हुए कहा कि 10वीं के नतीजों के बाद अब 11वीं कक्षा की काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने वाली है। जब 90% स्टाफ ड्यूटी पर है, तो यह अहम प्रक्रिया कौन संभालेगा और बच्चों की कक्षाएं कौन लेगा?

प्रिंसिपल ने आला अधिकारियों से लगाई गुहार, समाधान का अब भी इंतजार

शिक्षक लगातार यह मांग कर रहे हैं कि मेरिटोरियस जैसे विशेष स्कूलों को बड़े स्तर पर ऐसी ड्यूटियों से पूरी तरह छूट दी जानी चाहिए, ताकि यहां पढ़ने वाले होनहार छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों में कोई बाधा न आए। इस गंभीर संकट को लेकर स्कूल की प्रिंसिपल सतवंत कौर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से बातचीत की गई है। उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी को इस पूरी समस्या से अवगत करा दिया गया है और जिला प्रशासन को भी लिखित में ईमेल भेजा गया है। हालांकि, इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी डिंपल मदान से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिल सका। फिलहाल, प्रशासन की इस लापरवाही के कारण स्कूल के मेधावी छात्रों की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है।

Meritorious School Faces Imminent Closure: 90% of Staff Assigned Duties That Have Brought Students