गढ़शंकर: पंजाब के गढ़शंकर इलाके से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां रेलवे विभाग की घोर लापरवाही के कारण गांव बसियाला के सरपंच गुरदेव सिंह को बिना गार्ड वाले रेलवे क्रॉसिंग पर मजबूरन एक गेटमैन की भूमिका निभानी पड़ रही है। रेलवे द्वारा अब तक इस फाटक पर किसी स्थायी कर्मचारी की तैनाती न किए जाने के कारण सरपंच ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। इस गंभीर स्थिति के चलते पूरे गांव को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और इलाके में हर समय एक बड़े ट्रेन हादसे का खतरा मंडराता रहता है।
हादसे के डर से सरपंच ने खुद उठाया जिम्मा
अपनी इस अनोखी लेकिन मजबूर ड्यूटी के बारे में बात करते हुए सरपंच गुरदेव सिंह बताते हैं कि उन्हें हमेशा इस बात का खौफ सताता रहता है कि सुरक्षा के अभाव में यहां कभी भी कोई जानलेवा दुर्घटना हो सकती है। रेलवे फाटक पर कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर खुद फाटक खोलने और बंद करने का काम करना पड़ता है। उनका कहना है कि इस गंभीर मसले को लेकर उन्होंने कई बार आला अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए और मदद की गुहार लगाई, लेकिन अभी तक विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है।
रेलवे का दिया गया वैकल्पिक रास्ता भी असुरक्षित
सरपंच ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि रेलवे ने उन्हें नवांशहर के गांव मुबारिकपुर से निकलने वाला एक रास्ता दिया है, जबकि उनके गांव बसियाला और रसूलपुर गढ़शंकर क्षेत्र में पड़ते हैं। यह वैकल्पिक रास्ता सुनसान है और दोपहर या शाम के समय महिलाओं व बच्चों के अकेले आने-जाने के लिहाज से बेहद खतरनाक है। इसके अलावा, इस रास्ते से किसानों की गन्ने से भरी भारी ट्रॉलियां भी नहीं गुजर सकतीं। सरपंच ने बताया कि पहले गांव वालों ने अपने स्तर पर दस हजार रुपये महीने के वेतन पर एक व्यक्ति को फाटक पर रखा था, लेकिन कुछ समय बाद उसने भी यह जोखिम भरा काम छोड़ दिया। उसके जाने के बाद से सरपंच खुद ही इस फाटक का संचालन कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री के आश्वासन पर टिकी ग्रामीणों की आस
गांव के लोगों में रेलवे प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बार-बार विभिन्न नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर इस फाटक पर रेलवे कर्मचारी तैनात करने की मांग की है। पहले रेलवे ने मनमानी करते हुए इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया था, लेकिन ग्रामीणों के कड़े संघर्ष के बाद इसे दोबारा खोला गया। हाल ही में इस मामले को लेकर पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से मुलाकात की थी। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही एक विशेष टीम भेजकर इस फाटक पर कर्मचारी की तैनाती की जाएगी। फिलहाल, पूरा गांव रेलवे विभाग से जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग कर रहा है, ताकि किसी अप्रिय घटना को समय रहते टाला जा सके।

With the Railways failing to deploy any staff, the village Sarpanch himself has stepped in as the gateman








