You are currently viewing पति की मौत पर पत्नी को क्यों नहीं मिले LIC के 5 लाख? सुप्रीम कोर्ट ने खोला 11 साल पुराना ‘राज’

पति की मौत पर पत्नी को क्यों नहीं मिले LIC के 5 लाख? सुप्रीम कोर्ट ने खोला 11 साल पुराना ‘राज’

नई दिल्ली: बीमा पॉलिसी लेते समय अगर आपने अपनी किसी आदत या बीमारी का ‘राज’ छिपाया है, तो यह आपके परिवार को मुसीबत के समय कंगाल बना सकता है। ऐसा ही एक मामला सुप्रीम कोर्ट में सामने आया, जहां एक पति द्वारा छिपाई गई शराब की लत की आदत ने उसकी मौत के बाद पत्नी को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया। 11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद भी पत्नी को फूटी कौड़ी नहीं मिली।

यह फैसला उन करोड़ों बीमाधारकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो आवेदन फॉर्म भरते समय छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं।

क्या है पूरा मामला?
हरियाणा के झज्जर निवासी महिपाल सिंह ने 2013 में LIC की ‘जीवन आरोग्य’ स्वास्थ्य पॉलिसी खरीदी थी। फॉर्म भरते समय उन्होंने खुद को पूरी तरह स्वस्थ और नशामुक्त बताया था। लेकिन पॉलिसी लेने के एक साल के भीतर ही, जून 2014 में, पेट में तेज दर्द और उल्टियों के बाद कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई।

LIC ने क्यों खारिज किया था क्लेम?
जब महिपाल की पत्नी सुनीता सिंह ने इलाज के खर्च के लिए क्लेम किया, तो LIC ने यह कहकर क्लेम खारिज कर दिया कि महिपाल को शराब की गंभीर लत थी, जिसे उन्होंने जानबूझकर छिपाया था। LIC ने मेडिकल रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि अत्यधिक शराब के सेवन से महिपाल के लिवर और किडनी खराब हो गए थे, जो अंततः उनकी मौत का कारण बने।

निचली अदालतों से मिली थी जीत, पर…
सुनीता सिंह ने इस फैसले के खिलाफ जिला उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां फैसला उनके हक में आया। अदालत ने LIC को ब्याज सहित ₹5,21,650 का भुगतान करने का आदेश दिया। राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोगों ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। लेकिन LIC इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई।

सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में दिए अपने ऐतिहासिक फैसले में निचली अदालतों के आदेशों को पलटते हुए LIC की दलील को सही माना। कोर्ट ने कहा कि बीमाधारक ने जो तथ्य (शराब की लत) छिपाया था, अंत में वही उसकी मौत का कारण बना। बीमा ‘परम सद्भाव’ के सिद्धांत पर काम करता है। शराब जैसी आदत की जानकारी देना अनिवार्य है क्योंकि इससे कंपनी का जोखिम जुड़ा होता है। अगर छिपाई गई जानकारी ही बाद में मौत या बीमारी का कारण बनती है, तो बीमा कंपनी क्लेम देने के लिए बाध्य नहीं है।

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Jaspreet Singh (@akstudyvisa1)

Why did the wife not get 5 lakhs