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पंजाब में 43% पनीर के सैंपल फेल, देसी घी और दूध की हालत भी खस्ता; 5 साल में 5400 से ज्यादा खाद्य पदार्थ जांच में अनफिट

चंडीगढ़: पंजाब में मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों का काला कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति रोजाना इस्तेमाल होने वाले दूध और डेयरी उत्पादों की है। दूसरे राज्यों से सप्लाई होने वाला घटिया पनीर और मिलावटी दूध प्रदेश भर में धड़ल्ले से खपाया जा रहा है। जांच में पनीर के भीतर ऐसे खतरनाक रसायनों की मौजूदगी मिली है, जो मानव शरीर के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 वर्षों के दौरान पंजाब से भरे गए खाद्य सैंपलों में से 16.67 प्रतिशत जांच में पूरी तरह फेल साबित हुए हैं।

5 वर्षों में 32 हजार से अधिक सैंपल, 5491 मानकों पर फेल
स्वास्थ्य मंत्रालय की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से लेकर 2025-26 तक पंजाब में कुल 32,928 खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए। इनमें से 5,491 सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे और सीधे तौर पर रिजेक्ट हो गए। साल 2025-26 के दौरान लिए गए 7,809 सैंपलों में से 1,031 सैंपल फेल पाए गए, जिसके बाद 723 मामलों में भारी जुर्माना ठोका गया और 25 मिलावटखोरों को अदालत से सजा सुनाई गई। वहीं 2024-25 में 4,131 सैंपलों में से 748 फेल रहे थे। लगातार सामने आ रहे ये आंकड़े साफ करते हैं कि जैसे-जैसे सैंपलिंग का दायरा बढ़ रहा है, मिलावटखोरी की डरावनी सच्चाई खुलकर सामने आ रही है।

पनीर में खतरनाक रसायनों की मिलावट, 43 फीसदी सैंपल निकले घटिया
विशेष जांच अभियानों के दौरान सबसे चौंकाने वाले और डरावने खुलासे पनीर की गुणवत्ता को लेकर हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार, लिए गए 2,340 पनीर के सैंपलों में से 1,027 सैंपल जांच में फेल हो गए। यानी बाजार में बिक रहा लगभग 43 फीसदी पनीर तय मानकों के विपरीत था। इनमें से 7.09 फीसदी सैंपल सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य के लिए ‘असुरक्षित’ और जहरीले पाए गए, जिनमें घातक केमिकल्स का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने 589 केस दर्ज किए हैं।

देसी घी और दूध की हालत भी खस्ता, सैकड़ों पर केस दर्ज
पनीर के अलावा देसी घी और दूध के नमूनों ने भी स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ा दी है। देसी घी के लिए गए 1,160 सैंपलों में से 183 फेल साबित हुए, जिनमें करीब 9.83 प्रतिशत घी स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से असुरक्षित पाया गया। विभाग ने इस संबंध में 73 मुकदमे दर्ज किए हैं। वहीं पिछले तीन सालों में दूध के 2,559 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 700 सैंपल सब-स्टैंडर्ड पाए गए और 11 सैंपल स्वास्थ्य के लिए सीधे तौर पर खतरनाक निकले। दूध में मिलावटखोरी को लेकर 467 मामले दर्ज कर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

43% of paneer samples in Punjab failed tests; the quality of desi ghee and milk is also poor