जालंधर: पंजाब के खेल हब जालंधर के एक और होनहार बेटे ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया है। मिट्ठू बस्ती के रहने वाले 20 वर्षीय युवा हॉकी खिलाड़ी प्रभदीप सिंह ने जूनियर एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में स्वर्ण पदक डाल दिया। अपने अंतरराष्ट्रीय डेब्यू टूर्नामेंट में ही प्रभदीप ने हर मुकाबले में गोल दागकर विरोधी टीमों के डिफेंस को ध्वस्त किया और भारत को चैंपियन बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाई। जीत के बाद जब प्रभदीप जालंधर पहुंचे, तो ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया।
दक्षिण कोरिया को 4-1 से रौंदकर बना भारत चैंपियन
चीन में 4 से 13 सितंबर तक आयोजित हुए जूनियर एशिया कप के खिताबी मुकाबले में भारतीय जूनियर हॉकी टीम ने दक्षिण कोरिया को 4-1 के बड़े अंतर से हराकर ट्रॉफी अपने नाम की। इस ऐतिहासिक जीत के बाद प्रभदीप ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि तिरंगे के लिए गोल्ड जीतना उनके जीवन का सबसे भावुक और गर्व भरा पल है। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट में पाकिस्तान, जापान, कोरिया और मलेशिया जैसी दिग्गज एशियाई टीमों के खिलाफ मैच बेहद चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन टीम के जबरदस्त आपसी तालमेल और कड़ी ट्रेनिंग की बदौलत भारत अजेय रहा।
पिता ने सड़क पर ईंटें रखकर शुरू कराया था अभ्यास
प्रभदीप के इस स्वर्णिम सफर की शुरुआत किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनके पिता राजिंदर सिंह ने बताया कि बचपन में प्रभदीप को क्रिकेट का शौक था, लेकिन 8-9 साल की उम्र में उसने अचानक हॉकी स्टिक थामने की जिद की। उस दौरान इलाके का हॉकी मैदान बंद पड़ा था, जिसके बाद पिता ने घर के बाहर सड़क पर ईंटें रखकर बेटे को ड्रिबलिंग और शॉट्स का अभ्यास कराना शुरू किया। इसके बाद कोच दविंदर के मार्गदर्शन, खडूर साहिब अकादमी और फिर मशहूर सुरजीत हॉकी अकादमी की सख्त ट्रेनिंग ने प्रभदीप को तराशा। प्रभदीप इससे पहले सब-जूनियर, जूनियर नेशनल और बेल्जियम व नीदरलैंड के यूरोप दौरों पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं।
मां की अरदास और मिट्ठापुर के ओलंपियनों की प्रेरणा
प्रभदीप के घर पहुंचते ही भावुक मां सुखविंदर कौर ने अपने चैंपियन बेटे को गले से लगा लिया। मां ने कहा कि जब बेटा पहली बार विदेशी सरजमीं पर खेलने निकला था, तो उन्होंने वाहेगुरु से अरदास की थी कि वह देश का सिर ऊंचा करके लौटे। उल्लेखनीय है कि प्रभदीप जालंधर के उसी खेल परिवेश से ताल्लुक रखते हैं, जिसने देश को मनप्रीत सिंह और मनदीप सिंह जैसे दिग्गज ओलंपियन दिए हैं। प्रभदीप ने बताया कि सीनियर खिलाड़ियों से उन्हें लगातार खेल सुधारने के गुर सीखने को मिलते हैं और अब उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय सीनियर हॉकी टीम की नीली जर्सी पहनकर देश के लिए ओलंपिक खेलना है।


Learned hockey amidst bricks, won gold for the country on his debut; 20-year-old Prabhdeep




