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यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 13 करोड़ से बनेगा हाईटेक यार्ड; अब मिनटों में चमकेंगी ट्रेनें और नहीं होंगी लेट

चंडीगढ़: चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। स्टेशन पर लगातार बढ़ती ट्रेनों की संख्या को देखते हुए रेलवे ने अब अपने मेंटेनेंस यार्ड को पूरी तरह से हाईटेक करने का फैसला लिया है। इसके लिए करीब 13 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट तैयार किया गया है। इन नई और आधुनिक सुविधाओं के शुरू होने से ट्रेनों की सफाई और रखरखाव बहुत ही कम समय में हो सकेगा, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा क्योंकि इससे ट्रेनों के लेट होने की संभावना काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

मेंटेनेंस के लिए अब कालका नहीं भेजनी पड़ेंगी ट्रेनें

वर्तमान में रेलवे स्टेशन के पुराने मेंटेनेंस यार्ड में ही ट्रेनों का रखरखाव किया जाता है। जगह और आधुनिक सुविधाओं की कमी के चलते, जब ट्रेनों की संख्या बढ़ती है तो कुछ ट्रेनों को मजबूरन मेंटेनेंस के लिए कालका भेजना पड़ता है। लेकिन यह नया हाईटेक यार्ड बनने के बाद इन सभी ट्रेनों की देखरेख चंडीगढ़ में ही संभव हो सकेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नई तकनीक के आने से पूरी प्रक्रिया में तेजी आएगी और कई ट्रेनों की मेंटेनेंस का काम जो पहले लंबा समय लेता था, वह अब महज 3 घंटे के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सर्दियों में कोहरे और देरी की समस्या से मिलेगी निजात

अक्सर सर्दियों के मौसम में यात्रियों को ट्रेनों की देरी का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है। अधिकारियों का मानना है कि गर्मियों में तो ट्रेनों के संचालन पर ज्यादा असर नहीं पड़ता, लेकिन सर्दियों में भारी कोहरे और देरी के कारण ट्रेनों की मेंटेनेंस में सामान्य से अधिक समय लग जाता है, जिससे ट्रेनें अपने तय समय पर रवाना नहीं हो पातीं। यात्रियों की इसी बड़ी परेशानी को देखते हुए रेलवे ने मेंटेनेंस एरिया में दो नई वॉशिंग लाइनें बनाने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है ताकि धुंध के मौसम में भी काम की रफ्तार कम न हो।

कंप्यूटर तकनीक और ऑटोमैटिक सिस्टम से लैस होगा यार्ड

इस नए हाईटेक यार्ड में आधुनिक सुविधाओं की कोई कमी नहीं होगी। इसमें हाई-स्पीड ऑटोमैटिक वॉशिंग सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे न सिर्फ ट्रेनों की बाहरी सफाई बेहद कम समय में हो जाएगी, बल्कि पानी की भी भारी बचत होगी। इसके साथ ही, 6 या उससे अधिक पिट लाइन वाला एक आधुनिक यार्ड तैयार किया जा रहा है जहां एक साथ कई ट्रेनों का काम हो सकेगा। रेलवे अब लेजर और कंप्यूटर आधारित तकनीक का इस्तेमाल करेगा। ट्रेनों के पहियों की जांच के लिए स्वचालित मशीनें, पटरियों की मजबूती के लिए आधुनिक स्विच, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, और ट्रेनों की पूरी हिस्ट्री व मेंटेनेंस रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए टैग आधारित सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा रेल ग्राइंडिंग और हाई-आउटपुट टैपिंग मशीनों का भी इस्तेमाल होगा।

सुरक्षा और मेंटेनेंस के समय में आएगा बड़ा बदलाव

रेलवे स्टेशन के यार्ड में तीन तरह की (प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्मिनल) ट्रेनों की देखरेख की जाती है। अधिकारियों के मुताबिक, सबसे ज्यादा समय और ध्यान प्राइमरी ट्रेनों की मेंटेनेंस में लगता है क्योंकि पूरी जांच के बाद ही इन्हें सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। अगर रास्ते में ट्रेन में कोई भी तकनीकी खराबी आती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी यार्ड की होती है। वर्तमान में प्राइमरी ट्रेनों की मेंटेनेंस में करीब 6 घंटे, सेकेंडरी ट्रेनों में 4 घंटे और टर्मिनल ट्रेनों में लगभग 3 घंटे का समय लगता है। नई तकनीकों के आने के बाद इस समय में भारी कटौती होगी और ट्रेनों का संचालन कहीं अधिक सुरक्षित व सुचारू हो जाएगा।

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