पटियाला: पंजाब में गेहूं की कटाई खत्म होते ही खेतों में आग लगने यानी नाड़ (पराली) जलाने के मामलों में अचानक भारी उछाल आया है। राज्य सरकार और प्रशासन की तमाम सख्तियों और चेतावनियों के बावजूद किसान धड़ल्ले से खेतों में अवशेषों को आग के हवाले कर रहे हैं। हालात कितने चिंताजनक हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज पिछले पांच दिनों के भीतर ही राज्य में पराली जलाने के मामले दोगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, 1 मई तक पंजाब में नाड़ जलाने के 1759 मामले दर्ज किए गए थे, जो 5 मई तक बढ़कर 3690 तक पहुंच गए। यानी मात्र पांच दिनों में आगजनी के 1931 नए मामले सामने आ चुके हैं।
प्रशासन का एक्शन: 191 FIR दर्ज, 25 लाख से ज्यादा का लगा जुर्माना
नाड़ जलाने की इन बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन भी लगातार कार्रवाई कर रहा है। नियमों की अनदेखी करने वालों पर चाबुक चलाते हुए पूरे राज्य में अब तक 511 मामलों में किसानों पर कुल 25 लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है, जिसमें से लगभग 1 लाख 55 हजार रुपये की वसूली भी हो गई है। इसके अलावा, पुलिस और प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 191 एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं और 305 मामलों में किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ भी की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पर्यावरण से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी यह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
संगरूर में सबसे बुरा हाल, इन जिलों में भी धधक रहे खेत
अगर जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें, तो संगरूर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां अब तक सबसे अधिक 432 मामले सामने आए हैं। इसके बाद फिरोजपुर में 408 और बठिंडा में 317 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा तरनतारन (312), फाजिल्का (242), श्री मुक्तसर साहिब (231), मानसा (223), गुरदासपुर (182), बरनाला (175), अमृतसर (165) और पटियाला (151) समेत राज्य के लगभग हर जिले से नाड़ जलाने की खबरें लगातार आ रही हैं। मोहाली (16), नवांशहर (17), पठानकोट (16) और रोपड़ (3) जैसे जिलों में मामले तुलनात्मक रूप से काफी कम हैं।
अगली फसल की जल्दबाजी बन रही पर्यावरण के लिए खतरा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में गेहूं की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है और अब किसान धान की अगली फसल के लिए खेत तैयार करने में जुट गए हैं। समय बचाने और कम लागत के लालच में कई किसान नाड़ का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा करने के बजाय उसे सीधे आग लगा रहे हैं। विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि खेतों में आग लगाने से न सिर्फ जमीन के मित्र कीट मरते हैं और उपजाऊ शक्ति नष्ट होती है, बल्कि इससे पैदा होने वाला जहरीला धुआं हवा को प्रदूषित कर लोगों की सेहत के लिए भी बेहद गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।

Government’s Crackdown Proves Ineffective in Punjab: Stubble Burning Cases Double in 5 Days








