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चंडीगढ़ में ED का बड़ा एक्शन, सब्जी बेचने वाले से करोड़पति बने फाइनेंसर की 11 करोड़ की संपत्ति कुर्क

चंडीगढ़: चंडीगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फाइनेंसर रामलाल की 11 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। करीब चार साल लंबी चली जांच के बाद रामलाल के इस काले साम्राज्य का खुलासा हुआ। रामलाल पर 11 करोड़ रुपये की ठगी के दो मामले दर्ज थे, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले में ईडी ने स्पेशल कोर्ट में अपनी चार्जशीट भी पेश कर दी है।

करोड़ों की ठगी से जुड़ा है पूरा मामला

फाइनेंसर रामलाल पर आरोप है कि उसने गुरुग्राम के एक कारोबारी अतुल्य शर्मा से पांच करोड़ रुपये और हरियाणा के एक रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू ऑफिसर नरेश कुमार से छह करोड़ रुपये की ठगी की थी। पुलिस द्वारा इन मामलों में गिरफ्तारी के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि रामलाल के नाम पर शहर में 10 मकान, फ्लैट, एक कोठी, चार बूथ और 28 कनाल से अधिक कृषि भूमि है। ईडी ने फिलहाल सेक्टर-46 स्थित उसकी सात करोड़ रुपये की आलीशान कोठी और अन्य संपत्तियों सहित कुल 11 करोड़ की संपत्ति जब्त की है।

सब्जी की रेहड़ी से शुरू हुआ था करोड़पति बनने का सफर

रामलाल की कहानी फर्श से अर्श तक पहुंचने की है। वह मूल रूप से राजस्थान के सीकर का रहने वाला है और सिर्फ तीसरी कक्षा तक पढ़ा है। साल 1976 में 19 साल की उम्र में वह एक बैग लेकर चंडीगढ़ आया था। शुरुआत में वह राम दरबार की करसन कॉलोनी की झुग्गियों में रहा और गुजारे के लिए फल-सब्जी की रेहड़ी लगाने लगा। इसी दौरान उसने अपनी रेहड़ी पर आने वाले स्थानीय नेताओं और बड़े अफसरों से संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया।

रसूखदारों की मिलीभगत से खड़ा किया काले धन का साम्राज्य

नेताओं और अधिकारियों से करीबी का फायदा उठाकर रामलाल ने पहले झुग्गियां डलवाने का काम किया और बाद में पक्का मकान हासिल कर लिया। रसूख के दम पर उसे राशन डिपो मिला और फिर उसने फाइनेंस और प्रॉपर्टी डीलिंग की दुनिया में कदम रखा। जांच में खुलासा हुआ है कि उसका फाइनेंस का कारोबार महज एक दिखावा था। वह अवैध रूप से लोगों को ऊंचे ब्याज पर कर्ज देता था और पैसे न चुका पाने की स्थिति में उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर लेता था। उसकी बिना लाइसेंस की ‘चौधरी प्रॉपर्टीज’ नाम की फर्म भी इसी तरह के अवैध कामों में लिप्त थी।

अपराध की दुनिया में एंट्री और पतन की शुरुआत

पैसा और रसूख बढ़ने के साथ ही रामलाल अपराध की दुनिया में भी सक्रिय हो गया। उस पर हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी, चोरी और यहां तक कि हत्या के भी कई मामले दर्ज हुए। हालांकि, कई मामलों में वह कानूनी दांवपेच खेलकर बरी होता रहा। लेकिन, गुरुग्राम के कारोबारी और रेवाड़ी के रिटायर्ड अफसर से करोड़ों की ठगी के मामलों ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया और इसी के बाद ईडी ने उसकी बेतहाशा संपत्ति की जांच कर उसके साम्राज्य को ढहा दिया।

राजनीति में भी किस्मत आजमाने की हुई थी कोशिश

अपराध और प्रॉपर्टी के काले धंधे से पैसा कमाने के बाद रामलाल ने राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश की थी। उसने चंडीगढ़ विकास मंच के टिकट पर मौली जागरां से 2006 में नगर परिषद का चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उसने राम दरबार सीट से भी चुनाव लड़ा, लेकिन वहां भी उसे जनता ने नकार दिया। लगातार मिली हार के बाद उसने राजनीति से तौबा कर ली और अपना पूरा ध्यान फाइनेंस के धंधे पर लगा दिया।

ED takes major action in Chandigarh, seizes property worth Rs 11 crore belonging to a vegetable