जालंधर: जालंधर शहर इन दिनों भारी गंदगी और बदबू की मार झेल रहा है। नगर निगम कर्मचारियों और यूनियन नेताओं की लगातार चल रही हड़ताल ने शहर की सफाई व्यवस्था की कमर पूरी तरह से तोड़ दी है। आलम यह है कि पिछले पांच दिनों से कूड़े का उठाव पूरी तरह ठप पड़ा है, जिससे शहर की प्रमुख सड़कें और चौक-चौराहे डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो गए हैं। एक तरफ जहां शहर को खूबसूरत बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे, वहीं अब हर तरफ पसरी गंदगी से महामारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है।
हड़ताल से शहर भर में लगा कूड़े का अंबार
शहर में सफाई व्यवस्था का जिम्मा उठाने वाले कर्मचारी अब सरकार और निगम प्रशासन के खिलाफ पूरी तरह से लामबंद हो गए हैं। सरकार समर्थक चंदन गरेवाल और बंटू सबरवाल गुट के यूनियन नेता भी इस हड़ताल में कूद पड़े हैं। इस विरोध प्रदर्शन का असर इतना व्यापक है कि सरकारी ड्राइवरों ने कूड़ा उठाने से साफ इनकार कर दिया है और निजी ठेकेदारों को भी काम नहीं करने दिया जा रहा। शनिवार को हालात तब और बेकाबू हो गए जब आक्रोशित कर्मचारियों ने पीएनबी चौक से लेकर भगवान वाल्मीकि चौक तक ओल्ड जीटी रोड के बीचों-बीच कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगा दिए। इससे न सिर्फ यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ, बल्कि राहगीरों का बदबू के मारे वहां से गुजरना भी मुहाल हो गया।

मेयर की ब्यूटीफिकेशन योजना पर फिरा पानी
जालंधर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए मेयर वनीत धीर द्वारा किए जा रहे तमाम प्रयासों पर इस हड़ताल ने पानी फेर दिया है। शहर की बिगड़ती सूरत के बीच प्लाजा चौक डंप, जिसे काफी मशक्कत के बाद बंद किया गया था, वहां फिर से कूड़े के पहाड़ खड़े होने लगे हैं। जगह-जगह सड़ांध मारते कचरे की वजह से स्थानीय निवासियों में भी निगम प्रशासन और सरकार के खिलाफ भारी रोष पनप रहा है। लोगों को डर सता रहा है कि अगर जल्द ही हालात सामान्य नहीं हुए तो शहर में कोई गंभीर बीमारी विकराल रूप ले सकती है।
607 करोड़ का प्रोजेक्ट और पक्की नौकरी की मांग
इस पूरे बवाल की मुख्य जड़ 607 करोड़ रुपए का सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट है, जिसे निगम प्रशासन एक निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी कर रहा है। यूनियन नेता इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं और उनकी मांग है कि इस प्रोजेक्ट का निजीकरण किसी भी कीमत पर न किया जाए। इसके साथ ही 1,196 सफाई कर्मचारियों को पक्का करने की रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करने का भी दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, निगम प्रशासन के लिए मौजूदा हालात में इन दोनों ही बड़ी मांगों को तुरंत मान लेना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

मंगलवार की अहम बैठक पर टिकी निगाहें
अब सबकी नजरें मंगलवार को होने वाली पार्षद हाउस की अहम बैठक पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है और निजीकरण पर मुहर लग सकती है। वहीं, पक्के कर्मचारियों की भर्ती में आ रही कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि यूनियन और प्रशासन के बीच चल रही यह खींचतान कितनी लंबी खिंचेगी और जालंधर के आम लोगों को इस दमघोंटू कूड़े की समस्या से आखिर कब निजात मिलेगी।


Piles of garbage accumulate on Jalandhar streets due to sanitation workers’ strike; workers outraged




