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पंजाब में थमेंगे सरकारी बसों के पहिए, 3 दिन चक्का जाम का बड़ा ऐलान; सफर पर निकलने से पहले पढ़ लें ये जरूरी खबर

जालंधर: पंजाब में सरकारी बसों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बेहद ही जरूरी खबर है। राज्यभर के 27 डिपो के पीआरटीसी (PRTC) और पनबस कर्मचारियों ने सरकार की नई ‘किलोमीटर स्कीम’ के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो पूरे पंजाब में सरकारी बसों का चक्का पूरी तरह से जाम कर दिया जाएगा। इस बड़े ऐलान के बाद राज्य में आवाजाही और परिवहन व्यवस्था का एक बड़ा संकट खड़ा होता साफ नजर आ रहा है।

ये है हड़ताल का पूरा शेड्यूल: इस दिन से डिपो में खड़ी हो जाएंगी बसें

जालंधर में हुई यूनियन की एक अहम बैठक के बाद कर्मचारी नेताओं ने अपनी आगे की खौफनाक रणनीति का खुलासा किया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे 15 तारीख को प्रशासन के साथ होने वाली बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। अगर इस बैठक में कोई ठोस और उनके हक में समाधान नहीं निकलता है, तो 17 तारीख को ही सभी सरकारी बसें डिपो में खड़ी कर दी जाएंगी। इसके ठीक अगले दिन यानी 18 तारीख को पूरे राज्य में एक दिन की सांकेतिक हड़ताल होगी। विरोध यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि 25, 26 और 27 तारीख को पूरे पंजाब में पूर्ण ‘चक्का जाम’ कर दिया जाएगा, जिससे परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी।

आखिर क्या है ‘किलोमीटर स्कीम’ और क्यों भड़के हैं कर्मचारी?

इस पूरे विवाद की जड़ वह ‘किलोमीटर स्कीम’ है, जिसे लेकर कर्मचारियों में भारी रोष है। यूनियन का सीधा आरोप है कि इस योजना के तहत सरकार प्राइवेट बस मालिकों को 28 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से फिक्स भुगतान करने जा रही है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर बस 100 किलोमीटर चलती है, तो मालिक को 3000 रुपये मिलना तय है, चाहे बस में सवारियों से कमाई सिर्फ 1000 रुपये ही क्यों न हो। कर्मचारियों का कहना है कि यह सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाकर निजी हाथों की जेबें भरने की एक साजिश है। जालंधर-1 के डिपो प्रधान बिक्रमजीत सिंह ने दो टूक कह दिया है कि अगर यह स्कीम जबरन थोपी गई, तो विभाग के कर्मचारी इन प्राइवेट बसों के लिए कंडक्टर बिल्कुल नहीं देंगे और न ही इन्हें सड़कों पर चलने देंगे।

सरकारी नौकरियों पर मंडराया खतरा, जनता को झेलनी पड़ेगी भारी परेशानी

कर्मचारियों का सबसे बड़ा डर यह है कि किलोमीटर स्कीम के लागू होने से बस और ड्राइवर दोनों प्राइवेट हो जाएंगे, जिससे भविष्य में सरकारी ड्राइवरों के पद हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। अपने रोजगार को बचाने के लिए यूनियन अब इस टेंडर को सिर्फ टालने के बजाय इसे पूरी तरह रद्द कराने की जिद पर अड़ गई है। यूनियन नेताओं ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि उनके इस कड़े विरोध प्रदर्शन से आम जनता को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आम लोगों को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन अपने हक, रोजी-रोटी और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उनके पास अब इस उग्र आंदोलन के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

Government Buses in Punjab to Come to a Halt: Major Announcement of a 3-Day Strike