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पिता की मौत पर बेटे ने खेला घिनौना खेल, 35 लाख की वसूली के लिए लिख डाला फर्जी सुसाइड नोट; इस एक बड़ी गलती ने खोल दी पोल

लुधियाना: जिले के एतिआणा गांव में 82 वर्षीय बुजुर्ग पशु चारा कारोबारी कुंदन लाल की खुदकुशी के मामले में एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। पिता की मौत के गम में डूबने के बजाय, लालची बेटे ने 35 लाख रुपये की वसूली के लिए इस दर्दनाक घटना को ही हथियार बना लिया। पुलिस को मृतक की जेब से जो दो पन्नों का सुसाइड नोट मिला था, वह पूरी तरह से फर्जी निकला। इस नोट को किसी और ने नहीं, बल्कि मृतक के सगे बेटे धरमिंदर कुमार ने अपने देनदारों को झूठे केस में फंसाने की नीयत से लिखा था। हालांकि, शातिर बेटे की एक छोटी सी चूक ने उसकी पूरी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया।

हस्ताक्षर में कर दी इतनी बड़ी चूक

सुसाइड नोट लिखते समय धरमिंदर से सबसे बड़ी गलती पिता के हस्ताक्षर करने में हो गई। उसने जल्दबाजी में अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते हुए ‘कुंदन लाल’ की जगह ‘कुंदन सिंह’ लिख दिया। इसके अलावा, सुसाइड नोट की लिखावट भी किसी 81-82 साल के बुजुर्ग व्यक्ति की नहीं लग रही थी। पुलिस ने जब इन सुरागों को पकड़कर बेटे धरमिंदर को तलब किया और सख्ती से पूछताछ की, तो वह ज्यादा देर तक झूठ नहीं बोल सका और उसने अपनी गलती मान ली।

इंस्पेक्टर के तजुर्बे ने ऐसे पकड़ा झूठ

इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने में थाना सुधार के प्रभारी इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह के तजुर्बे ने सबसे अहम भूमिका निभाई। सुसाइड नोट में जिक्र था कि कुंदन लाल ने अलग-अलग लोगों से 35 लाख रुपये लेने थे, जो फोन नहीं उठा रहे थे और इसी मानसिक तनाव में आकर उन्होंने शनिवार रात जहर खा लिया। इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह ने बताया कि उनके 35 साल के करियर में यह पहला ऐसा अजीब मामला था जहां किसी को 35 लाख रुपये ‘लेने’ हों और उसने जान दे दी हो। अमूमन लोग कर्ज देने में असमर्थ होने पर ऐसा कदम उठाते हैं। इसी शक ने पुलिस को बारीकी से जांच करने पर मजबूर कर दिया।

पंचायत ने भी मोड़ा मुंह, बिना केस दर्ज हुए हुआ अंतिम संस्कार

जब बेटे धरमिंदर का यह घिनौना झूठ बेनकाब हुआ, तो गांव की पंचायत ने भी उसका साथ छोड़ दिया। पंचायत ने दो टूक कह दिया कि वे किसी भी झूठे और गलत मामले में उसका बिल्कुल समर्थन नहीं करेंगे। पंचायत के इस सख्त रुख के बाद धरमिंदर पूरी तरह से टूट गया। इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह ने बताया कि जांच में किसी भी तरह की आपराधिक साजिश या खुदकुशी के लिए उकसाने के पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। इसलिए फिलहाल किसी के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस ने धारा 174 के तहत कानूनी कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया, जिसके बाद शाम को बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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