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कनाडा में पीआर का इंतजार कर रहे पंजाबियों की चमकी किस्मत, 33 हजार वर्कर्स को पक्की नागरिकता दे रही सरकार; तुरंत जान लें नए नियम

जालंधर: कनाडा में लंबे समय से वर्क परमिट पर काम कर रहे लोगों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। कनाडा सरकार ने ‘इन-कनाडा वर्कर्स इनिशिएटिव’ के तहत देश में पहले से रह रहे 33 हजार विदेशी वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंस (पीआर) देने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। यह कदम मुख्य रूप से उन लोगों को फायदा पहुंचाएगा जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में रहकर वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। इस नई नीति से पंजाब के उन हजारों युवाओं की उम्मीदों को पंख लगे हैं, जो लंबे समय से पक्के होने का सपना देख रहे थे।

छोटे शहरों में काम करने वालों को मिलेगा बड़ा तोहफा

कनाडा इस वक्त भारी लेबर संकट से जूझ रहा है, जिसे देखते हुए ट्रूडो सरकार ने ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में काम करने वाले प्रवासियों को नागरिकता देने का मन बनाया है। कनाडा की इमिग्रेशन मिनिस्टर लेना मेटलेज डायब के अनुसार, बजट 2025 में किए गए वादे को पूरा करते हुए अब पीआर देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि साल 2026 में कम से कम 20 हजार वर्कर्स को पीआर दे दी जाए, जबकि बाकी बचे आवेदनों को 2027 तक निपटा लिया जाएगा। खुशी की बात यह है कि साल 2026 के शुरुआती दो महीनों (जनवरी-फरवरी) में ही 3,600 लोगों को इस शानदार स्कीम के तहत पक्की नागरिकता मिल भी चुकी है।

इन शर्तों को पूरा करने वालों की खुलेगी किस्मत

इस योजना का लाभ किन लोगों को मिलेगा, इसके लिए इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटीजनशिप कनाडा (IRCC) ने नियम बिल्कुल साफ कर दिए हैं। पीआर केवल उन्हीं प्रवासियों को दी जाएगी जो किसी छोटे समुदाय या ग्रामीण इलाके में कम से कम दो साल से रह रहे हैं। दो साल से कम अनुभव वालों को इसका फायदा नहीं मिलेगा। इसके साथ ही यह जरूरी है कि आवेदक प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP), अटलांटिक इमिग्रेशन प्रोग्राम, केयरगिवर पायलट या एग्री-फूड पायलट जैसी किसी योजना के तहत पहले ही पीआर के लिए आवेदन कर चुके हों। सबसे बड़ी राहत यह है कि योग्य उम्मीदवारों को कोई नया फॉर्म नहीं भरना होगा। विभाग खुद इन्वेंट्री में मौजूद पुराने पेंडिंग आवेदनों को प्राथमिकता देकर तेजी से प्रोसेस करेगा।

छात्रों के लिए मुश्किल हुआ कनाडा का सफर

जहां एक तरफ वर्कर्स के लिए पीआर के दरवाजे खुले हैं, वहीं छात्रों के लिए पढ़ाई के रास्ते कनाडा में बसने की राह अब काफी मुश्किल हो गई है। नई पॉलिसी के तहत स्टूडेंट वीजा के मौकों में भारी कटौती की जा रही है। साल 2026 में केवल 1.55 लाख छात्रों को ही कनाडा आने की अनुमति मिलेगी, जो साल 2025 के मुकाबले लगभग आधा है। इसका सीधा असर पंजाब के उन युवाओं पर पड़ेगा जो स्टडी वीजा के जरिए विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा, नए वर्क परमिट पर जाने की चाहत रखने वालों के लिए भी नियम सख्त हुए हैं, क्योंकि सरकार ने नए वर्क परमिट देने के लक्ष्य में भी कमी कर दी है।

लेबर शॉर्टेज और आबादी का संतुलन है मुख्य कारण

कनाडा सरकार द्वारा पीआर बांटने का इतना बड़ा फैसला लेने के पीछे दो सबसे अहम कारण बताए जा रहे हैं। ग्रामीण विकास सचिव बकले बेलांजर के मुताबिक, खेती, हेल्थकेयर और कंस्ट्रक्शन जैसे जरूरी सेक्टर्स में वर्कर्स की भारी कमी है और सरकार इस पहल के जरिए उसी कमी को खत्म करना चाहती है। इसके अलावा, सरकार की योजना है कि 2027 के अंत तक देश में अस्थायी निवासियों की संख्या को कुल आबादी के पांच प्रतिशत से कम कर दिया जाए। इसी वजह से पहले से रह रहे अस्थायी लोगों को पक्का किया जा रहा है। आवेदकों की सुविधा के लिए इस पूरे मिशन की प्रोग्रेस कनाडा सरकार अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर हर महीने अपडेट कर रही है ताकि लोगों को पल-पल की जानकारी मिल सके।

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