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अब न्यूजीलैंड ने दिया पंजाबियों को बड़ा झटका, वीजा नियमों में किया भारी बदलाव; एयरपोर्ट से ही हो रहे डिपोर्ट

चंडीगढ़: विदेश में जाकर बसने और डॉलर कमाने की चाहत रखने वाले पंजाबियों की राह अब और भी मुश्किल हो गई है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बाद अब न्यूजीलैंड सरकार ने भी अपनी इमिग्रेशन नीतियों में ऐसा कड़ा बदलाव किया है, जिसने लाखों युवाओं की नींद उड़ा दी है। इन नए और सख्त नियमों का सीधा असर भारतीयों, विशेषकर पंजाब से जाने वाले छात्रों और कामगारों पर पड़ रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि अब वीजा हासिल करना लोहे के चने चबाने जैसा हो गया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, न्यूजीलैंड जाने की आस लगाए बैठे करीब 42 फीसदी छात्रों का वीजा धड़ल्ले से रद्द किया जा चुका है। वहीं, वर्क परमिट पर जाने वाले हर दस में से लगभग तीन से चार भारतीयों को रिजेक्शन का कड़वा घूंट पीना पड़ रहा है।

अंग्रेजी टेस्ट हुआ अनिवार्य

न्यूजीलैंड सरकार ने विदेशी कामगारों के लिए एंट्री का दरवाजा काफी संकरा कर दिया है। अब क्लीनर, ड्राइवर, नैनी या पेट्रोल पंप वर्कर जैसी लो-स्किल नौकरियों के लिए भी अंग्रेजी का टेस्ट पास करना पूरी तरह से जरूरी कर दिया गया है। पहले लोग बिना सर्टिफिकेट के महज थोड़ी-बहुत अंग्रेजी बोलकर काम चला लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इसके अलावा, वर्क वीजा के लिए प्रति घंटा औसत वेतन की सीमा भी काफी बढ़ा दी गई है। इसका सीधा नुकसान यह हो रहा है कि छोटी कंपनियों या रिश्तेदारों के लिए पंजाब से वर्कर बुलाना नामुमकिन सा हो गया है। ओपन वर्क वीजा पर जाने वाले लोग भी अब वहां अपनी मर्जी से टैक्सी चलाने या खुद का छोटा-मोटा बिजनेस करने के लिए आजाद नहीं होंगे, उन्हें किसी तय कंपनी में ही काम करना होगा।

स्टडी वीजा के लिए ढीली करनी होगी जेब

पढ़ाई की आड़ में न्यूजीलैंड पहुंचकर पक्के होने की जुगाड़ में लगे लोगों पर भी इमिग्रेशन विभाग ने बड़ा शिकंजा कसा है। स्टूडेंट वीजा की फीस में भारी इजाफा करते हुए इसे 41 हजार रुपये से अधिक कर दिया गया है। सिर्फ फीस ही नहीं, बल्कि अब छात्रों को अपने बैंक खाते में कम से कम 11.20 लाख रुपये का फंड भी साबित करना होगा। फर्जी एजुकेशन लोन, नकली बैंक स्टेटमेंट और जाली दस्तावेजों के आधार पर फाइल लगाने वालों को सीधा रिफ्यूजल मिल रहा है। इमिग्रेशन अधिकारी अब प्रोफाइल देखकर यह तय कर रहे हैं कि छात्र का मुख्य उद्देश्य वाकई पढ़ाई है या कुछ और। इसके साथ ही छोटे डिप्लोमा को किनारे करते हुए अब केवल बैचलर या मास्टर डिग्री करने वालों को ही पढ़ाई के बाद तीन साल का वर्क परमिट दिया जाएगा, जो जिंदगी में सिर्फ एक बार ही मिलेगा।

एयरपोर्ट पर सरप्राइज इंटरव्यू, जरा सी चूक और सीधा देश निकाला

हाथ में वीजा आ जाने का मतलब अब यह बिल्कुल नहीं है कि आप न्यूजीलैंड में दाखिल हो ही जाएंगे। सरकार ने बॉर्डर पर सख्ती कई गुना बढ़ा दी है। अब एयरपोर्ट पर ही इमिग्रेशन अधिकारी आपका सरप्राइज इंटरव्यू ले सकते हैं। इस दौरान अगर कोई व्यक्ति अंग्रेजी में अपनी नौकरी, सैलरी या पढ़ाई से जुड़े सवालों के सही जवाब देने में लड़खड़ाता है या अधिकारी को उस पर शक होता है, तो उसे बिना कोई मौका दिए एयरपोर्ट से ही सीधे भारत डिपोर्ट किया जा रहा है।

छुट्टी मनाने घर आए युवाओं की भी रोक दी गई एंट्री

नए इमिग्रेशन नियमों की गाज सिर्फ नए आवेदकों पर ही नहीं, बल्कि उन लोगों पर भी गिर रही है जो पहले से वहां काम कर रहे हैं और छुट्टी बिताने अपने घर आए थे। बीते एक हफ्ते के भीतर ही पंजाब के दो ऐसे खौफनाक मामले सामने आ चुके हैं। होशियारपुर की एक युवती जब छुट्टियां काटकर वापस न्यूजीलैंड लौटी, तो अधिकारियों ने उसे एयरपोर्ट पर ही रोक दिया और एंट्री देने से मना कर दिया। इसी तरह जालंधर का एक युवक भी भारत लौटते वक्त नियमों के पचड़े में फंस गया और पिछले कई दिनों से मलेशिया में फंसा हुआ है। जानकारों के मुताबिक, न्यूजीलैंड प्रशासन जॉब फ्रॉड को लेकर बेहद सख्त है। अगर किसी वर्कर के पीछे से उसकी कंपनी का लाइसेंस फ्रॉड या शोषण के आरोप में रद्द हो जाता है, तो उस वर्कर का वीजा भी बिना किसी पूर्व सूचना के अमान्य कर दिया जाता है।

New Zealand Delivers Major Blow to Punjabis: Drastic Changes to Visa Rules; People Being Deported Directly from the Airport