You are currently viewing मौत का कुआं बनी फरीदकोट की केंद्रीय जेल, 10 दिन में तीसरे कैदी ने लगाया फंदा; जेल अधीक्षक ने बताई आत्महत्या के पीछे की वजह

मौत का कुआं बनी फरीदकोट की केंद्रीय जेल, 10 दिन में तीसरे कैदी ने लगाया फंदा; जेल अधीक्षक ने बताई आत्महत्या के पीछे की वजह

फरीदकोट: फरीदकोट की अति-सुरक्षित मानी जाने वाली केंद्रीय जेल इन दिनों लगातार हो रही कैदियों की मौतों के कारण सुर्खियों में है। सोमवार की रात एक और कैदी ने जेल की बैरक के बाथरूम में फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। पिछले 10 दिनों के भीतर जेल के अंदर आत्महत्या का यह तीसरा मामला सामने आने से प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

11 साल पुराने हत्या के मामले में काट रहा था सजा

मृतक कैदी की पहचान फाजिल्का जिले के गांव काठगढ़ निवासी बलविंदर सिंह (पुत्र तारा सिंह) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, बलविंदर सिंह थाना सदर जलालाबाद में दर्ज 11 साल पुराने हत्या के एक संगीन मामले में जेल में अपनी सजा काट रहा था। सोमवार रात अचानक उसने अपनी बैरक के बाथरूम में लगे लोहे के चैनल से फंदा बना लिया। आनन-फानन में जेल प्रशासन उसे बेहोशी की हालत में फरीदकोट के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन वहां पहुंचने तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के तुरंत बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

10 दिनों के अंदर जेल में तीसरी खौफनाक घटना

इस घटना ने पूरे जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, क्योंकि महज दस दिन के अंदर यह तीसरी आत्महत्या है। इससे पहले 25 अप्रैल को लुधियाना के रहने वाले हवालाती जुगनू बाबा ने अपनी जान दे दी थी। वहीं, उसके कुछ ही दिन बाद 3 मई को फिरोजपुर के कैदी स्वर्णजीत सिंह ने भी जेल के अंदर फांसी का फंदा चूम लिया था। लगातार हो रही मौतों के बाद थाना सिटी फरीदकोट पुलिस और जेल प्रशासन अब इस नए मामले की भी गहराई से जांच में जुट गए हैं।

जेल अधीक्षक ने बताई आत्महत्या के पीछे की चौंकाने वाली वजह

बैक-टू-बैक हो रही इन मौतों पर फरीदकोट जेल के अधीक्षक इकबाल सिंह ने सफाई दी है। उनका कहना है कि कैदी अक्सर घरेलू परेशानियों और लंबे समय तक परिवार से मुलाकात न हो पाने के कारण गहरे मानसिक तनाव में चले जाते हैं। इसी डिप्रेशन के चलते वे खौफनाक कदम उठा लेते हैं। उन्होंने बताया कि जेल में कैदियों का तनाव दूर करने के लिए समय-समय पर प्रयास किए जाते हैं और काउंसलिंग की जाती है। इन दर्दनाक घटनाओं को रोकने के लिए अब इस प्रक्रिया में और भी तेजी लाई जाएगी ताकि कैदियों को मानसिक रूप से स्वस्थ रखा जा सके।

 

Faridkot Central Jail Turns into a ‘Death Trap’: Third Inmate Hangs Himself in 10 Days