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पंजाब: पिता की ईंटों से हत्या करने वाले कलयुगी बेटे को उम्रकैद, गवाही से मुकरा भाई लेकिन ऐसे खुल गया पूरा राज

मोहाली: मोहाली की एक अदालत ने पिता की बेरहमी से हत्या करने वाले एक कलयुगी बेटे को उम्रकैद की सख्त सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सजा का ऐलान होते ही दोषी रिंकू को सीधा जेल भेज दिया गया। इस मामले में सरकारी वकील ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभ) अपराध बताते हुए मौत की सजा की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने सभी पहलुओं पर गौर करने के बाद इसे उस श्रेणी से बाहर रखते हुए उम्रकैद की सजा मुकर्रर की।

नशे के लिए पैसे न मिलने पर उठाया था खौफनाक कदम

यह खौफनाक वारदात 12 फरवरी 2020 की रात खरड़ शहर के मुंडी खरड़ इलाके में हुई थी। पुलिस के मुताबिक, 50 वर्षीय मृतक हंस राज मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनका बेटा रिंकू पूरी तरह बेरोजगार था और उसे नशे की गंभीर लत लग चुकी थी। पिता हंस राज उसे इस बात के लिए अक्सर डांटते थे। वारदात वाली रात जब पिता ने रिंकू को नशे के लिए पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, तो गुस्से में अंधे होकर उसने ईंटों से अपने पिता के सिर पर कई जानलेवा वार कर दिए। इस भयानक हमले में हंस राज की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।

अदालत में अपने ही बयानों से मुकर गया सगा भाई

इस जघन्य हत्याकांड की शिकायत सबसे पहले रिंकू के सगे भाई सोनू ने ही पुलिस में दर्ज कराई थी। हालांकि, जब मामला अदालत में पहुंचा और गवाही का समय आया, तो सोनू अपने ही पुलिसिया बयानों से पूरी तरह मुकर गया। उसने कोर्ट में रिंकू को निर्दोष बता दिया। अदालत ने इस स्थिति को समझते हुए माना कि भाई ने यह बयान आपसी भाईचारे और परिवार के दबाव में आकर बदला है। इसके बाद कोर्ट ने मौखिक गवाही की बजाय वैज्ञानिक और अन्य ठोस सबूतों पर भरोसा करने का फैसला किया।

फोरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट ने खोला हत्या का पूरा राज

सगे भाई के मुकरने के बाद सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) की अहम रिपोर्ट ने दोषी को सजा दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। रिपोर्ट में इस बात की स्पष्ट पुष्टि हुई कि घटना के बाद रिंकू के कपड़ों पर लगे खून के धब्बे और घटनास्थल से बरामद ईंटों पर मिला खून मृतक हंस राज के डीएनए से सौ प्रतिशत मेल खाता है। इसके अलावा मृतक के भाई बलवीर सिंह की गवाही, जिसमें उन्होंने रिंकू के नशेड़ी होने और पैसों के लिए झगड़ने की बात कही थी, ने भी केस को मजबूत किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सिर की चोट और ज्यादा खून बहने से मौत की पुष्टि हुई। तमाम वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए बेटे को सजा सुनाई। 

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