नई दिल्ली: भारत में ऑनलाइन लेन-देन की रीढ़ बन चुके यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आगामी 15 अक्टूबर से यूपीआई आधारित भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाएगा। फोनपे (PhonePe), पेटीएम (Paytm), गूगल पे (Google Pay) जैसे लोकप्रिय डिजिटल ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपयोगकर्ताओं के बीच इस फैसले के बाद भारी असमंजस की स्थिति बन गई थी, जिसे सरकार ने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
आम ग्राहकों की जेब पर नहीं पड़ेगा कोई बोझ
सरकार ने साफ कर दिया है कि नए नियमों से आम उपभोक्ताओं और यूजर्स पर एक भी रुपये का अतिरिक्त भार नहीं आएगा। अगर कोई व्यक्ति फोनपे, गूगल पे या पेटीएम से रोजमर्रा की खरीदारी या किसी को पैसे ट्रांसफर करता है, तो उसके बैंक खाते से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं कटेगा। यह शुल्क पूरी तरह से ‘पर्सन टू मर्चेंट’ (P2M) ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और इसका भुगतान केवल चुनिंदा व्यापारियों (मर्चेंट्स) को अपने एक्वायरिंग बैंक को करना होगा।
₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.40% शुल्क का गणित
नए नियम के मुताबिक, 2,000 रुपये तक के किसी भी पेमेंट पर शून्य प्रतिशत (0%) एमडीआर रहेगा। 2,000 रुपये से अधिक की राशि के व्यापारिक लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत की दर से एमडीआर वसूला जाएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई ग्राहक किसी मर्चेंट को 3,000 रुपये का भुगतान करता है, तो व्यापारी को 0.4% के हिसाब से 12 रुपये शुल्क देना होगा। वहीं 50,000 रुपये की खरीदारी पर यह शुल्क 200 रुपये बनेगा।
अधिकतम कैप तय, 75 हजार से ऊपर सिर्फ ₹300 लगेगा चार्ज
व्यापारियों को राहत देने के लिए सरकार ने एमडीआर शुल्क की अधिकतम सीमा भी निर्धारित कर दी है। एक लाख रुपये के भुगतान पर 0.4% की दर से शुल्क भले ही 400 रुपये बनता हो, लेकिन सरकार ने अधिकतम सीमा 300 रुपये पर फिक्स (कैप) कर दी है। यानी 75,000 रुपये या उससे अधिक की किसी भी बड़ी खरीदारी पर मर्चेंट से अधिकतम केवल 300 रुपये ही काटे जाएंगे। यह पूरी कटौती व्यापारी के खाते से होगी, जिससे ग्राहकों का यूपीआई अनुभव पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त बना रहेगा।


New rule for UPI payments starting October 15: Find out which transactions will attract charges and how it will impact regular users.




