नई दिल्ली: सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक चर्चित मामले में जेल में बंद पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत में दूसरी बार जमानत की गुहार लगाने पहुंचे निलंबित आईपीएस अधिकारी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह मामला सौ फीसदी खारिज (Dismiss) होने लायक है। इसके साथ ही पीठ ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी।
चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ की खरी-खरी: अभी खारिज करें या बाद में?
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की विशेष पीठ के समक्ष जब हरचरण सिंह भुल्लर की दूसरी जमानत याचिका आई, तो अदालत ने सख्त रुख अख्तियार किया। पीठ ने वकील से सीधा सवाल करते हुए कहा, “यह 100 फीसदी खारिज होने वाला केस है!.. आप इसे अभी खारिज करवाना चाहते हैं या बाद में?” अदालत के इस कड़े रुख के बाद पीठ ने फिलहाल सुनवाई को 4 हफ्तों के लिए टाल दिया और संकेत दिया कि कुछ अहम गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद ही जमानत याचिका पर दोबारा विचार किया जाएगा।
निचली अदालत में गवाहियों का हवाला देकर मांगी थी राहत
सुनवाई के दौरान भुल्लर के वकील ने दलील दी कि मामले के शिकायतकर्ता और मुख्य गवाह के बयान अभी तक दर्ज नहीं हो पाए हैं। बचाव पक्ष ने शीर्ष अदालत से दो शैडो गवाहों से पूछताछ की अनुमति मांगी। साथ ही यह तर्क भी दिया गया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अधिकतम सजा 7 साल की है और भुल्लर अपनी गिरफ्तारी के बाद से काफी लंबा समय जेल में काट चुके हैं। हालांकि, अदालत ने फिलहाल इन दलीलों को राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना।
सरहिंद थाने की FIR में राहत देने के बदले 8 लाख मांगने का आरोप
पूरा विवाद 11 अक्टूबर 2025 को आकाश बत्ता नामक कारोबारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। आरोप है कि सरहिंद पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी में कारोबारी के व्यापार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने और केस में रियायत देने के बदले हरचरण सिंह भुल्लर ने अपने एक बिचौलिए कृषानु के जरिए रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई ने फोन पर हुई बातचीत रिकॉर्ड की थी, जिसमें कथित तौर पर भुल्लर ने कृषानु को शिकायतकर्ता से ₹8 लाख वसूलने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सीबीआई ने 16 अक्टूबर 2025 को केस दर्ज कर भुल्लर को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद से वे लगातार न्यायिक हिरासत में हैं।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से पहले भी लग चुका है झटका
इससे पहले 16 फरवरी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भुल्लर की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। तब अदालत ने कहा था कि हाईकोर्ट का फैसला सही प्रतीत होता है क्योंकि मामले में कई प्रमुख गवाहों की गवाही होना अभी बाकी है। हालांकि, तब भुल्लर ने दावा किया था कि सेवा से निलंबित होने के कारण अब उनके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोई गुंजाइश नहीं बची है, लेकिन अदालत ने उनकी इन दलीलों को खारिज कर दिया था।


Suspended DIG Bhullar approaches Supreme Court seeking bail; a remark by the CJI compounds his troubles.




