चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) के पोस्टग्रेजुएट (MA) इतिहास पाठ्यक्रम से सिख इतिहास और पंजाब के समृद्ध अतीत को अनिवार्य विषय की श्रेणी से हटाकर वैकल्पिक (ऑप्शनल) बनाने पर बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले के सामने आते ही राज्य की राजनीति गरमा गई है। बठिंडा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है।
‘पंजाब विरोधी फैसला, पहचान मिटाने की कोशिश’: हरसिमरत कौर बादल
हरसिमरत कौर बादल ने अपने पत्र में तीखा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन का यह फैसला पूरी तरह पंजाब विरोधी और अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास और गुरु साहिबान के बलिदानों को मुख्य पाठ्यक्रम से हटाकर केवल एक वैकल्पिक विषय या फुटनोट तक सीमित करने से सिख समुदाय और पंजाबियों की भावनाओं को भारी ठेस पहुंची है। सांसद ने आरोप लगाया कि यह पंजाब की समृद्ध सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सुनियोजित ढंग से कमजोर करने का प्रयास है।
NEP के तर्क पर उठे सवाल, पुराना सिलेबस बहाल करने की उठी मांग
हालांकि, पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बदलाव के पीछे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के 4+1 फ्रेमवर्क के तहत पाठ्यक्रम के पुनर्गठन का तर्क दिया है। इसके बावजूद छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के बढ़ते विरोध के बीच हरसिमरत बादल ने साफ किया कि नीति की आड़ में सिख इतिहास के अनिवार्य महत्व को खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि एमए इतिहास के इस नए पाठ्यक्रम को अविलंब निरस्त किया जाए और पुराने सिलेबस को औपचारिक लिखित आदेश जारी कर तुरंत बहाल किया जाए।


Harsimrat Badal writes to the Centre over making Sikh history optional; demands immediate revocation of Punjab University’s decision




