जालंधर: पंजाब में कोयले की किल्लत के चलते गहराते बिजली संकट ने आम जनजीवन के साथ-साथ उद्योगों और खेती-किसानी की कमर तोड़ दी है। राज्य भर में शाम होते ही अघोषित बिजली कटौती का दौर शुरू हो रहा है, जिससे शहरों में 3 से 4 घंटे और ग्रामीण इलाकों में घंटों बत्ती गुल रहने लगी है। राज्य में रविवार सुबह बिजली की मांग रिकॉर्ड 15,762 मेगावाट के पार पहुंच गई, जिससे पावर ग्रिड पर दबाव चरम पर आ गया है। इस बीच पंजाब के बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया है कि हालात पर नजर रखी जा रही है और एक-दो दिनों के भीतर इस समस्या को सुलझा लिया जाएगा।
औद्योगिक पहिया थमा, किसानों के सूखे ट्यूबवेल
बिजली संकट की सबसे गंभीर मार राज्य के बड़े औद्योगिक केंद्रों पर पड़ी है। लुधियाना, जालंधर और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों में 10 से 11 घंटे तक लंबे बिजली कट लग रहे हैं, जिससे कारखानों में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही धान और अन्य फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को ट्यूबवेल चलाने के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में भारी रोष है।
पावर प्लांट्स में कोयले का सीमित स्टॉक
पंजाब के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का भंडार तेजी से घट रहा है। आंकड़ों के अनुसार राजपुरा थर्मल प्लांट में केवल 5 दिन और तलवंडी साबो में महज 9 दिन का कोयला बाकी रह गया है। लेहरा मोहब्बत में 12 दिन और गोइंदवाल में 17 दिन का स्टॉक बचा है, जबकि सिर्फ रोपड़ थर्मल प्लांट में स्थिति सामान्य है जहां 62 दिनों का कोयला मौजूद है। कोयले की सीमित उपलब्धता के कारण प्लांट्स अपनी पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं।
केंद्रीय कोटे से 1,051 मेगावाट कम बिजली मिलने का आरोप
बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने केंद्र सरकार पर राज्य के हिस्से की बिजली में कटौती करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पंजाब को इस समय केंद्रीय पावर पूल से उसके तय कोटे की तुलना में लगभग 1,051 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। इस संबंध में केंद्रीय बिजली मंत्री को औपचारिक पत्र लिखकर पूरा हिस्सा देने की मांग की गई है, ताकि राज्य के संकट को तुरंत कम किया जा सके और किसानों को निर्बाध बिजली दी जा सके।
मांग का 70 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय ग्रिड पर निर्भर
पंजाब राज्य पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के रियल-टाइम आंकड़ों के मुताबिक राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता इस समय केवल 4,626 मेगावाट तक सिमट गई है। इसके चलते राज्य अपनी कुल खपत का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केंद्रीय ग्रिड से हासिल करने पर मजबूर है, जहां से करीब 11,138 मेगावाट बिजली ली जा रही है। शेड्यूल से कम आपूर्ति होने के चलते पूरे राज्य में मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है।


Blackout threat looms in Punjab due to coal crisis; 11-hour power cuts bring industry and agriculture to a standstill




