
बठिंडा: होशियारपुर में 5 साल के बच्चे की निर्मम हत्या के बाद पूरे पंजाब में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है, जिसका असर अब गांवों में पंचायत के फैसलों पर भी दिखने लगा है। इसी बीच, बठिंडा जिले के गांव गहरी भागी की पंचायत ने एक विवादित फरमान जारी करते हुए प्रवासी मजदूरों पर कई तरह की सख्त पाबंदियां लगा दी हैं। गुरुद्वारा साहिब से बाकायदा मुनादी कर इन नियमों को लागू किया गया है।
पंचायत ने जो शर्तें लगाई हैं, उनके अनुसार, कोई भी प्रवासी मजदूर गाँव में घर या जमीन नहीं खरीद सकता है और न ही यहाँ अपना आधार कार्ड या वोटर कार्ड बनवा सकता है। काम के लिए आने वाले मजदूरों को गाँव में रहने की अनुमति नहीं होगी; उन्हें केवल खेतों में बनी मोटर पर ही रहना होगा। इसके साथ ही, जिस किसान के यहां वे काम करेंगे, उनकी पूरी जिम्मेदारी उसी किसान की होगी। पंचायत ने यह भी अनिवार्य कर दिया कि गांव में आने वाले प्रत्येक प्रवासी मजदूर की पुलिस वेरिफिकेशन कराई जाएगी।

गांव के सरपंच बलजीत सिंह ने कहा कि काम के लिए आने वाला कोई भी मजदूर अब गांव में बस नहीं पाएगा। न तो उसे वोट बनाने का अधिकार होगा, न आधार कार्ड और न ही वह कोई जमीन खरीद सकेगा। इस फैसले को भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) का भी समर्थन मिला है। बीकेयू के ब्लॉक अध्यक्ष जसवीर सिंह ने कहा कि यूपी-बिहार से आए प्रवासी मजदूर गांवों का माहौल खराब कर रहे हैं, इसलिए अब उन्हें यहां रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
हालांकि, गांव पंचायत का यह एकतरफा फैसला अब विवादों में घिर गया है और प्रशासनिक हलकों में इस पर चर्चा शुरू हो गई है। इसे भारतीय संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी माना जा रहा है।
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Strict order issued in Punjab








