चंडीगढ़: जालंधर के मशहूर बॉडी बिल्डर वरिंदर घुम्मन की अमृतसर के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान हुई दर्दनाक मौत के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को बड़ा झटका देते हुए इस मामले में गठित किए गए नए (दूसरे) मेडिकल बोर्ड की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर इस पूरी प्रक्रिया पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का सख्त आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सरकार से सीधा सवाल किया है कि जब पहले मेडिकल बोर्ड की जांच में लापरवाही पूरी तरह से साबित हो चुकी है और जिम्मेदार डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक हैं, तो फिर दूसरे बोर्ड के गठन की नौबत क्यों आई?
रसूखदार अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों को बचाने का आरोप
इस पूरे मामले में मृतक बॉडी बिल्डर के परिजनों ने व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक के परिजन भूपिंदर सिंह ने एडवोकेट मेहर सचदेवा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दूसरे मेडिकल बोर्ड के गठन को खुली चुनौती दी है। पीड़ित परिवार का साफ तौर पर आरोप है कि फोर्टिस अस्पताल का प्रबंधन बेहद रसूखदार है और पहली रिपोर्ट में दोषी पाए गए डॉक्टरों को सजा से बचाने के लिए ही नियमों को ताक पर रखकर यह दूसरी जांच बिठाई गई है। अदालत ने भी पूछा है कि आखिर सरकार के पास ऐसे कौन से नए तथ्य सामने आ गए थे, जिसके आधार पर आनन-फानन में दोबारा जांच के आदेश जारी कर दिए गए।
पहली रिपोर्ट में 4 डॉक्टरों की लापरवाही से हुई थी मौत की पुष्टि
आपको बता दें कि जालंधर निवासी वरिंदर घुम्मन की अमृतसर के फोर्टिस अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना के बाद परिजनों के भारी हंगामे को देखते हुए सिविल सर्जन ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए 7 विशेषज्ञों का एक मेडिकल बोर्ड गठित किया था। उस पहले मेडिकल बोर्ड ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में अस्पताल के चार डॉक्टरों—तपिश शुक्ला, अलका तिवारी, राजेंद्र कौल और अरुण कुमार चोपड़ा—को इलाज में घोर लापरवाही बरतने का स्पष्ट रूप से दोषी पाया था। इसके बावजूद दूसरी जांच बैठाने पर उठे सवालों के बाद अब हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश से पीड़ित परिवार को न्याय की एक नई उम्मीद जगी है।

A Conspiracy to Shield Fortis Hospital Doctors? HC Takes Strict Stance in Varinder Ghumman Death








