अयोध्या में रामजन्मभूमि परिसर में ताबड़तोड़ फायरिंग और बम धमाका करने वाले आंतकी शकील, नसीम, आजीज और आसिफ इकबाल को हुई उम्र कैद, 14 वर्षो बाद मिला इंसाफ, जानियें कैसे हुआ था 2005 में हमला





अयोध्या उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर में साल 2005 में हुए आतंकी हमले के मामले में प्रयागराज की स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार को सजा का ऐलान कर दिया। कोर्ट ने मामले में दोषी करार दिए गए पांच में 4 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। वहीं एक आरोपी को बरी कर दिया है। बता दें कि स्पेशल जज एससी/एसटी दिनेश चंद्र की कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस 11 जून को ही पूरी हो चुकी थी। 

अस्थायी स्पेशल कोर्ट में सुनाया गया फैसला 

सुनवाई के दौरान 63 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाने की तिथि 18 जून को तय की थी। सुरक्षा कारणों से फैसला प्रयागराज की नैनी सेन्ट्रल जेल के अस्थायी स्पेशल कोर्ट में सुनाया गया, जहां आतंकी हमले के पांचों आरोपी इरफान, मोहम्मद शकील, मोहम्मद नसीम, मोहम्मद आजीज और आसिफ इकबाल उर्फ फारूख बंद थे। 

क्या हुआ था 5 जुलाई 2005 को?

पांच जुलाई को सुबह करीब सवा नौ बजे रामजन्म भूमि परिसर से ठीक पहले जैन मंदिर के पास बनी बैरिकेटिंग पर एक सफेद रंग की मार्शल जीप महिंद्रा इकोनॉमी आकर रूकी। इसमें सवार पांच लोग जीप के रुकते ही उसमें से कूदकर अलग-अलग दिशाओं में भागे। जैन मंदिर के पास तैनात 11 वीं वाहिनी पीएसी के दलनायक कृष्णचंद्र सिंह जब तक कुछ समझ पाते जीप में जोर का धमाका हुआ जिससे चारों ओर धुंआ छा गया। धमाके से लगभग दस मीटर बेरिकेटिंग उड़ गई थी। 

आतंकियों की ओर से सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाकर एके 47 राइफलों से गोलीबारी शुरू कर दी। आतंकी रॉकेट लांचर और ग्रेनेड का भी प्रयोग कर रहे थे। पांचों आतंकी अलग-अलग दिशा से मुख्य परिसर की ओर बढ़ रहे थे। पीएसी के जवानों ने उनकी चारों ओर से घेराबंदी शुरू कर दी। तब तक इनर कार्डेन में तैनात सीआरपीएफ की टुकड़ियों ने भी मोर्चा संभाल लिया था। सीआरपीएफ कंपनी कमांडर विजेरो टिनी और महिला कंपनी कमांडर संतोदेवी की टुकड़ी ने मुख्य परिसर को पूरी तरह से घेर लिया और जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। इससे आतंकी मुख्य परिसर में नहीं घुस सके। इस बीच 33 वीं वाहिनी पीएसी ने जैन मंदिर के पास बने जनरेटर रूम के बगल वाले मकान पर चढ़कर आतंकियों पर फायरिंग शुरू कर दी। इस सब में करीब आधे घंटे बीत गए थे।

अब तक फैजाबाद एसएसपी के साथ सिविल पुलिस भी मौके पर पहुंच चुकी थी। सिविल पुलिस ने सीता रसोई की ओर मोर्चा संभाल लिया। अब आतंकी चारों ओर से घिर चुके थे। करीब 11 बजे तक आतंकियों और सुरक्षाबल के बीच गोलियां चलती रहीं। थोड़ी देर बाद आतंकियों की ओर से फायरिंग बंद हो गई। इसके बावजूद सुरक्षाबलों ने ऐहतियात बरतते हुए करीब आधे घंटे इंतजार किया। जब आतंकियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो पूरे इलाके को घेर का कोंबिंग शुरू कराई गई।
  
कॉम्बिंग के दौरान इनर कार्डेन के पास सीमेंटेड रास्ते पर दो आतंकियों के शव पाए गए। दोनों की उम्र लगभग 30 वर्ष थी और उनके पास से एके 47 राफइलें, गोलियों, हैंडग्रेनेड और रॉकेट लांचर के अलावा चाइना मेड पिस्टल और कुरान बरामद की गई। दो आतंकियों के शव सीता रसोई के पश्चिमी हिस्से में झाड़ियों के बीच पाए गए। इनमें से एक आतंकी मानव बम बना था। उसने खुद को उड़ा लिया था। उसके शव के टुकड़े इधर उधर पड़े हुए जिससे उसके हुलिए और आयु का पता नहीं चल सका। इनके पास से भी रॉकेट लांचर, हैंड ग्रेनेड, एके 47 राइफल और बड़ी मात्रा में गोलियां तथा मैगजीन आदि बरामद हुई।

पांचवें आतंकी का शव जनरेटर रूम के पास आउटर कार्डेन की ओर से जाने वाले रास्ते पर मिला। इसकी उम्र करीब 25 वर्ष थी। इसके पास से भी आत्याधुनिक राइफल, ग्रेनड और गोलियां बरामद हुई। इस सब के अलावा आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल हैंडसेट भी घटना स्थल से बरामद किए गए।

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